मछली पालन और खेतो की सिंचाई का साधन बनेगा आजीविका डबरी।

मछली पालन और खेतो की सिंचाई का साधन बनेगा आजीविका डबरी।
विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के दिव्यांग अंधरू बैगा के लिए आजीविका डबरी बना वरदान।
कवर्धा – महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का उददेश्य ग्रामीणो को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऐसे परिसम्पत्तियों का निर्माण करना है जिससे ग्रामीण आत्मनिर्भर होकर आर्थिक गतिविधियों का संचालन कर सके। आजीविका संवर्धन की गतिविधियों से जुड़कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हुए गांव के अर्थव्यवस्था में भी सहयोग दे सके। इसी उददेश्य की पूर्ति के लिए जनपद पंचायत पंडरिया के ग्राम पंचायत लोखान के ग्राम कमराखोल में महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजाति के दिव्यांग हितग्राही श्री अंधरू बैगा के लिए निर्मित कराया जा रहे आजीविका डबरी सुनहरे भविष्य की निंव रखेगा। ग्राम सभा में मनरेगा अंतर्गत कराए जाने वालें कार्यो का विवरण प्रस्तुत करते हुए ग्रामीणो को अधिक से अधिक आजीविका डबरी के कार्य के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके फायदे जानकर हितग्राही श्री अंधरू बैगा द्वारा अपने लिए आजीविका डबरी का निर्माण करने की मांग किया गया। हितग्राही पूर्व से महात्मा गांधी नरेगा योजना में जाॅब कार्ड-CH02-004-113-002-113 से पंजीकृत होकर कार्य करते रहें है। ग्राम सभा के द्वारा प्रस्ताव पारित कर राशि 1.05 लाख रूपये की लागत से इनके लिए आजीविका डबरी स्वीकृत कराया गया। आजीविका डबरी का कार्य प्रगति पर है जिसमें अब तक 574 मानव दिवस का रोजगार ग्रामीणों को मिला है। दिव्यांग हितग्राही श्री अंधरू बैगा को 36 दिनों का रोजगार अपने लिए आजीविका डबरी बनाने में मिला और अभी तक राशि 9360 रूपये का मजदूरी भुगतान उनके छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक शाखा कूकदूर से प्राप्त हुआ है। श्री अंधरू बैगा के लिए 20×20×3 मीटर का आजीविका डबरी बन कर तैयार हो रहा है, जिसमें 894 घन मीटर जल भराव होगा। इस डबरी से एक ओर जहां हितग्राही के लिए मछली पालन के साथ बाड़ी एवं खेतो की सिंचाई के हेतु जल संग्रहण उपलब्ध होगा तो वही दूसरी ओर भू-जल स्तर में वृद्धि होने से आस-पास के क्षेत्रों को भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ होगा। श्री अंधरू बैगा का आजीविका डबरी अभी पूरा होने को है लेकिन भविष्य की योजना बनाकर तैयार है। मत्स्य पालन विभाग द्वारा विभागीय अभिसरण से इन्हें अन्य योजनाओं के लाभ पहूंचाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। कार्य पूर्ण होकर जल संग्रहण होते ही मछलीओं के बीज, आवश्यक दवाईयां एवं जाल प्रदाय करते हुए मत्स्य पालन के व्यवसाय से संबंधीत महत्वपूर्ण जानकारियां विभाग द्वारा इन्हें उपलब्ध करायी जायेगी। इसके साथ ही डबरी के मेढ़ एवं आस पास के क्षेत्रों में नमी होने से सब्जी उत्पादन का वयवसाय आजीविका के नये स्त्रोत बनेंगे। मछली पालन तथा सब्जीयों की बिक्री को आगे बढ़ाने के लिए सबसे निकट का बाजार कुई है। जहां इनके उत्पादन की खपत आसानी से होगी।
हितग्राही अंधरू बैगा के मन की बात।
हितग्राही अंधरू बैगा बताते है कि आजीविका डबरी का निर्माण होने से मेरे आर्थिक स्थिति में बहुत सुधार होगा। मछली पालन के लिए विभाग से बात हुई है तथा उनके द्वारा मुझे मछली बीज सहित सभी जरूरी चीजे उपलब्ध कराते हुए अन्य सहायता भी मिलेगी।अपने आजीविका के लिए खुद का साधन उपलब्ध होने से रोजगार के लिए किसी अन्य पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पडे़गी। डबरी से सब्जी उत्पादन का काम भी आसानी से कर सकूंगा। आजीविका डबरी बन जाने से मेरी आय बढ़ेगी और मै अपने परिवार का भरण पोषण पहले से और बेहतर कर सकूंगा। भविष्य अब सुखमय दिख रहा है क्योंकि मछली पालन करने की बरसो पूरानी इच्छा मनरेगा योजना से पूरा होने जा रही है।




