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लोकभवन में राज्यपाल के हाथों सम्मानित हुए शिक्षक लक्ष्मण बांधेकर

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लोकभवन में राज्यपाल के हाथों सम्मानित हुए शिक्षक लक्ष्मण बांधेकर



2 ब्रेल पुस्तक और 3100 से अधिक ऑडियोबुक का भव्य विमोचन

पंडरिया. दिव्यांगजनों के शैक्षिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल के तहत 27 जनवरी 2026 लोकभवन रायपुर में राज्यपाल माननीय रमेन डेका जी के द्वारा छत्तीसगढ़ के वीर तथा दिव्यांग महिलाओं की सफलता की कहानियों पर आधारित दो ब्रेल पुस्तक और तीन हजार से अधिक कंटेंट को संकलित कर बनाए गए ऑडियो बुक्स का विधिवत विमोचन किया गया।


ऑडियोबुक निर्माण कार्य में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से शामिल शिक्षकों में कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखण्ड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला रहमान कापा के शिक्षक लक्ष्मण बांधेकर द्वारा सामान्य ज्ञान, समसामयिकी, छत्तीसगढ़ी भाषा में दिव्यांगजनों की कहानियाँ एवं महिला सशक्तिकरण विषयों पर आधारित ऑडियो कंटेंट का संकलन एवं निर्माण किया गया, जिसके लिए उन्हें माननीय राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। कबीरधाम जिले से ही राज्यपाल पुरस्कृत प्रधान पाठक शिवकुमार बंजारे द्वारा “मोर छत्तीसगढ़ मोर गौरव” श्रृंखला तथा कमलेश कुमार लांझे द्वारा भारत के विभिन्न राज्यों की जानकारी पर आधारित ऑडियो श्रृंखला तैयार की गई। इस ऑडियोबुक में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के सभी विषयों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु विशेष प्लेलिस्ट शामिल है जो कि हिंदी, छत्तीसगढ़ी, हल्बी, पंजाबी, अंग्रेजी, सरगुजिया, संस्कृत आदि में यूट्यूब के “वर्ल्ड ऑडियोबुक” नामक चैनल पर निःशुल्क उपलब्ध है। इस अवसर पर माननीय राज्यपाल रमेन डेका जी ने इस अभिनव और मानवीय पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए “राष्ट्रीय मॉडल” बनाने की बात कही और इसे अपने गृह राज्य असम में भी लागू करने की इच्छा जताई। उन्होंने इसे केवल शैक्षणिक कार्य नहीं, बल्कि एक “संवेदनशील सामाजिक दायित्व” बताया।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिव्यांगता एवं मानसिक स्वास्थ्य पर दिए जा रहे विशेष ध्यान का भी उल्लेख किया। इस पुनीत के लिए उन्होंने सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए सम्मानित किया। यह ऑडियोबुक राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कृत सुश्री के. शारदा के मार्गदर्शन एवं सहयोग से तैयार किया गया। जो दृष्टिबाधित बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी पहल का सशक्त उदाहरण है।

उल्लेखनीय है कि इस अभियान की प्रेरणा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका सुश्री के. शारदा (दुर्ग) को वर्ष 2024 में सम्मान प्राप्त होने के पश्चात मिली। दृष्टिबाधित बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक आवश्यकताओं को समझते हुए उन्होंने 25 अक्टूबर 2024 से इस कार्य की शुरुआत की और स्वयं 800 से अधिक ऑडियोबुक्स तैयार की। बाद में प्रदेश के विभिन्न जिलों से शिक्षकों के जुड़ने से यह संख्या बढ़कर 3100 से अधिक तक पहुँच गई। इसके पूर्व सुश्री के. शारदा एवं प्रीति शांडिल्य द्वारा संयुक्त रूप से ब्रेल पुस्तकें तैयार कर छत्तीसगढ़ के 20 ब्रेल विद्यालयों को 100-100 प्रतियाँ निःशुल्क उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

ऑडियो बुक निर्माण में 30 शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही, जिनमें प्रमुख रूप से सुश्री के. शारदा, प्रीति शांडिल्य, शिवकुमार बंजारे, कमलेश लांझे, समीक्षा गायकवाड़, हिम कल्याणी सिन्हा, अनिल अवस्थी, संतोष तारक, रश्मि वर्मा, रिंकल बग्गा, ज्योति सराफ, चंचला चन्द्रा, सुशील पटेल, ज्योति बनाफर, दीपा महार, महेन्द्र कुमार चन्द्रा, ममता सिंह, बिसेलाल गायकवाड़, अमरदीप भोगल, ब्रजेश्वरी रावटे, मंजू साहू, वर्षा जैन, बलराम नेताम, रजनी शर्मा, परवीन दिवाकर, शांति सोनी, वीरेन्द्र कुमार, अमित कुमार उइके, चानी ऐरी एवं लक्ष्मण बांधेकर शामिल हैं।
यह संपूर्ण पहल दृष्टिबाधित बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा का सशक्त और प्रेरणादायी मॉडल प्रस्तुत करती है।

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