कबीरधाम शिक्षा विभाग में 218 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी उजागर, बीईओ कार्यालय से 4 साल में निकाली गई राशि का कोई लेखा-जोखा नहीं

कवर्धा। कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में भारी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय, कवर्धा से पिछले चार वर्षों में जिला कोषालय (ट्रेजरी) से निकाले गए करीब 218 करोड़ 4 लाख 87 हजार 344 रुपए का कोई लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। न कैश बुक, न बिल-वाउचर, न भुगतान रजिस्टर और न ही उपयोगिता प्रमाण पत्र—पूरा रिकॉर्ड शून्य पाया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा के निर्देश पर गठित 5 सदस्यीय ऑडिट टीम ने 24 और 25 नवंबर 2025 को बीईओ कार्यालय का लेखा परीक्षण किया। जांच के दौरान कार्यालय में आवश्यक वित्तीय दस्तावेज मौजूद नहीं मिले। इसके बाद ऑडिट टीम को ई-कोष (ट्रेजरी सॉफ्टवेयर) के आधार पर स्टेटमेंट निकालना पड़ा, जिसमें अरबों रुपए की निकासी का खुलासा हुआ।
ई-कोष के आंकड़ों से सामने आई करोड़ों की निकासी
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार—
अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 तक: 27 करोड़ 76 लाख 1 हजार 786 रुपए
अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक: 67 करोड़ 29 लाख 22 हजार 645 रुपए
अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक: लगभग 73 करोड़ 37 लाख रुपए
अप्रैल 2025 से अक्टूबर 2025 तक: 49 करोड़ 62 लाख 1 हजार 844 रुपए
इस तरह कुल 2,18,04,87,344 रुपए ट्रेजरी से आहरित हुए, लेकिन इनके खर्च का कोई अधिकृत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
जुलाई 2022 से बंद है कैश बुक
सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि तत्कालीन बीईओ संजय जायसवाल ने स्वयं लिखित रूप में स्वीकार किया है कि जुलाई 2022 से कार्यालय में कैश बुक का संधारण नहीं हो रहा। साथ ही बिल रजिस्टर भी अपूर्ण है।
25 नवंबर 2025 के पत्र में उन्होंने यह भी माना कि वेतन, रुका वेतन, वेतन वृद्धि, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, यात्रा भत्ता, विभिन्न अग्रिमों, सीसी बिल और कटौतियों से जुड़े दस्तावेज व नोटशीट भी ढाई से तीन वर्षों तक संधारित नहीं किए गए।
रिकॉर्ड सुधार के लिए 14 दिन का नोटिस, लीपापोती के आरोप
मामला सार्वजनिक होने के बाद बीईओ कार्यालय को 14 दिनों के भीतर कैश बुक और रिकॉर्ड दुरुस्त करने का नोटिस दिया गया है। हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि जो रिकॉर्ड तीन वर्षों से मौजूद नहीं हैं, वे मात्र दो सप्ताह में कैसे तैयार किए जा सकते हैं। इसे लेकर मामले को दबाने और लीपापोती के प्रयासों की भी चर्चा है।
तत्कालीन बीईओ संजय जायसवाल कटघरे में
पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी तत्कालीन बीईओ संजय जायसवाल के कार्यकाल से जुड़ती दिख रही है। उन्हीं के समय कैश बुक बंद हुई, रजिस्टरों का संधारण नहीं हुआ और ट्रेजरी से बड़ी राशि निकाली गई। उनकी भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा ने बताया कि ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं। संजय जायसवाल से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।



