बोड़ला हिंदू संगम में उमड़ा हिंदू एकता का महासागर, लोरमी से भी सम्मिलित हुए हिन्दू
बोड़ला हिंदू संगम में उमड़ा हिंदू एकता का महासागर, लोरमी से भी सम्मिलित हुए हिन्दू

टीकम निर्मलकर AP न्यूज़ लोरमी : मौनी अमावस्या पर आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक वैभव और राष्ट्रभाव का विराट संगम.मौनी अमावस्या के पावन एवं पुण्यदायी अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला हिंदू संगम, बोड़ला इस वर्ष भी सनातन संस्कृति की अखंड धारा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति के दिव्य भावों के साथ भव्यता एवं गरिमा से संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हिंदू चेतना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय कर्तव्यबोध का विराट महोत्सव बनकर उभरा।
इस ऐतिहासिक अवसर पर लोरमी के धर्म ध्वजवाहकों सहित आसपास के अनेक ग्रामों से हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए और “एक राष्ट्र, एक संस्कृति, एक समाज” की भावना को आत्मसात करते हुए हिंदुत्व की एकता का जीवंत अनुभव किया। संपूर्ण वातावरण मंत्रोच्चार, शंखनाद और जयघोषों से गूंज उठा, जिसने जनमानस को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

कार्यक्रम में कोलकाता से पधारे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह आदरणीय रामदत्त चक्रधर जी के साथ संत समाज एवं समाज प्रमुखों का सान्निध्य प्राप्त हुआ। आयोजित हिंदू सम्मेलन ने उपस्थित जनसमुदाय को सनातन मूल्यों, सामाजिक दायित्व और राष्ट्रधर्म के प्रति जाग्रत किया।“धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, विश्व का कल्याण हो” तथा “हिंदू-हिंदू भाई-भाई, जात-पात की पाटो खाई” जैसे गगनभेदी नारों से संपूर्ण परिसर राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक गौरव से ओतप्रोत हो गया। सभी अतिथियों का शास्त्र एवं शस्त्र से पारंपरिक एवं गरिमामय अभिनंदन किया गया, जो भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का प्रतीक रहा। हिंदू संगम की आत्मा रहे सामूहिक महायज्ञ में समाज के सभी वर्गों, जातियों और समुदायों के लोगों ने यजमान बनकर सहभागिता की। यह यज्ञ इस सत्य को सशक्त रूप से उद्घोषित करता रहा कि सनातन धर्म की मूल आत्मा समरसता, समानता और एकता में निहित है। इस अवसर पर लगभग 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने सामूहिक भोजन कर सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। साथ ही भव्य मेला, दिव्य प्रदर्शनी और सांस्कृतिक झांकियों ने जनमानस को आकर्षित किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वावलंबन एवं सामाजिक जागरण को केंद्र में रखते हुए अत्यंत आकर्षक और ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी लगाई गई, जो पूरे आयोजन का प्रमुख आकर्षण बनी। उल्लेखनीय है कि हिंदू संगम का यह आयोजन वर्ष 2013 से निरंतर आयोजित हो रहा है और प्रत्येक वर्ष इसका संदेश अधिक व्यापक, अधिक प्रभावशाली और अधिक प्रेरणादायी होता जा रहा है।
आयोजन के संदर्भ में गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री धनेश साहू ने कहा कि “बोड़ला हिंदू संगम में सभी जातियों और वर्गों के लोग समरस भाव से एकत्रित हुए हैं। यहां सभी ने संघ के पंच परिवर्तन को समझने और उसे अपने परिवार एवं समाज में लागू करने का संकल्प लिया है।” वहीं प्रदेश संयोजक श्री संतोष साहू ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा—
“जब-जब हिंदू जगा है, देश से संकट भागा है। आज इस भावना को चरितार्थ करने के लिए ही ऐसे आयोजनों की आवश्यकता है। भारतवर्ष का वैभव पुनर्जागरण के स्वर्णिम काल में प्रवेश कर चुका है, किंतु साथ ही आसुरी शक्तियां भी उसे दबाने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे समय में हम सभी हिंदुओं का दायित्व है कि जाति-पाति के भेदभाव को समाप्त कर ‘हिंदू-हिंदू भाई-भाई’ के संदेश को घर-घर तक पहुंचाएं और उसे अपने आचरण में उतारें.
इस हिंदू संगम की एक विशेष और प्रेरणादायी विशेषता यह रही कि बैगा-गुनिया अनुसूचित जनजाति समाज, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग सहित सभी समाजों की व्यापक एवं सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। उच्च-नीच के भेद को त्यागकर, एक समान पथ पर चलते हुए सभी ने स्वयं को केवल और केवल हिंदू के रूप में प्रस्तुत किया—यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि और सबसे बड़ा संदेश रहा। इस गरिमामय अवसर पर दयाराम साहू, सालिक राम राजपूत, संजय सिंह राजपूत, जटाशंकर दुबे, छत्रपाल कश्यप, लोमस कश्यप, हर्षकांत कश्यप, विनोद कश्यप, अनिल कश्यप, प्रफुल्ल दलाई, नरेंद्र ध्रुव, अरुण साहू, राजा मानिकपुरी, द्वारिका दास, ईशान खत्री, देवेंद्र केसरवानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण अपने परिवारजनों के साथ उपस्थित रहे। साथ ही प्रमुख अतिथियों में प्रांत संघ चालक टॉप लाल वर्मा, विभाग कार्यालय संजय पांडे, उत्तर यादव, चंद्रशेखर वर्मा, राजकुमार कश्यप एवं उमाशंकर सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भी गौरव प्रदान किया।
लोरमी एवं आसपास के विभिन्न ग्रामों से पहुंचे हिंदुत्वनिष्ठ श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को आध्यात्मिक आनंद, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति की चेतना से परिपूर्ण बताया। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने एक स्वर में भारत माता की भव्य आरती की, जिसने पूरे वातावरण को भाव-विभोर और राष्ट्रप्रेम से आलोकित कर दिया। बोड़ला हिंदू संगम इस प्रकार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण, हिंदू एकता के सुदृढ़ीकरण और भारत माता के वैभव को समर्पित संकल्पों का जीवंत प्रतीक बनकर इतिहास में अंकित हुआ—जहां हर स्वर राष्ट्र के लिए था, हर संकल्प समाज के लिए और हर आहुति भारत माता के चरणों में समर्पित थी।



