
पाकिस्तान जून 2018 से एफएटीएफ की ‘ग्रे लिस्ट’ में है, जो मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने में विफल रहा है, जिसके कारण आतंकी वित्तपोषण हुआ है। इसे अक्टूबर 2019 तक पूरा करने की कार्य योजना दी गई थी। लेकिन देश आतंकी संगठनों और उनके प्रायोजकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने में विफल रहा।




