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रूस से 21 नए मिग-29 फाइटर प्लेन खरीदेगा भारत, 59 विमानों का अपग्रेडेशन भी किया जाएगा

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Image Source : TWITTER/IAF_MCC

नई दिल्ली. चीन के साथ LAC पर विवाद जारी है। गलवान में हुई खूनी झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बड़ा हुआ है। इस बीच भारत ने रूस से 21 नए मिग-29 फाइटर प्लेन खरीदने का फैसला किया है। इसके अलावा मौजूदा 59 मिग 29 विमानों का अपग्रेडेशन किया जाएगा। Defence Acquisition Council की बैठक में ये बड़ा फैसला हुआ है। बैठक में 38 हजार 900 करोड़ा के रक्षा सौदे को मंजूरी दी गई है। इतना ही नहीं 12 सुखोई 30 MKI  की खरीद को भी मंजूरी दी गई है।

बैठक में मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना और नौसेना के लिए 248 एस्ट्रा बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर टाइम एयर मिसाइलों की खरीद को भी मंजूरी दी है। डीआरडीओ द्वारा एक 1,000 किलोमीटर की स्ट्राइक रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल के डिजाइन और विकास को भी मंजूरी दे दी गई है।

रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में 38,900 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई, जिनमें से 31,130 करोड़ रुपये के अधिग्रहण भारतीय उद्योग के होंगे। मंजूरी दी गई परियोजनाओं में पिनाका रॉकेट लांचर, BMP combat vehicle upgrades और सेना के लिए सॉफ्टवेयर परिभाषित रेडियो के गोला-बारूद शामिल हैं।

राफेल विमानों की पहली खेप के 27 जुलाई तक भारत पहुंचने की उम्मीद

बात दें कि फ्रांस से मिलने वाले राफेल विमानों में से छह राफेल युद्धक विमानों की पहली खेप 27 जुलाई तक मिलने की संभावना है। इन विमानों से भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। 

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन के साथ सैन्य झड़पों के बाद पिछले दो सप्ताह से वायु सेना अलर्ट पर है। उस झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। दोनों सेनाएं सात सप्ताह से उस क्षेत्र में आमने सामने हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दो जून को फ्रांसीसी समकक्ष फ्लोरेंस पर्ली से बातचीत की थी। 

बातचीत में उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के बावजूद भारत को राफेल जेट विमानों की आपूर्ति निर्धारित समय पर की जाएगी। सैन्य अधिकारियों ने नाम नहीं छापने क अनुरोध के साथ कहा कि राफेल विमानों के आने से भारतीय वायुसेना की समग्र लड़ाकू क्षमता में काफी इजाफा होगा और यह भारत के “विरोधियों” के लिए एक स्पष्ट संदेश होगा। इस बारे में पूछे जाने पर भारतीय वायुसेना ने कोई टिप्पणी नहीं की।

विमानों का पहला स्क्वाड्रन वायुसेना के अंबाला स्टेशन पर तैनात किया जाएगा जिसे भारतीय वायुसेना के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक माना जाता है। भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ लगभग 58,000 करोड़ रुपये की लागत से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह विमान कई शक्तिशाली हथियारों को ले जाने में सक्षम है। इसमें यूरोपीय मिसाइल निर्माता एमबीडीए का मेटॉर मिसाइल शामिल है।

राफेल विमानों का दूसरा स्क्वाड्रन पश्चिम बंगाल में हासिमारा बेस पर तैनात किया जाएगा। वायुसेना ने इस संबंध में दोनों अड्डों पर बुनियादी ढांचों के विकास के लिए लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इन 36 राफेल विमानों में 30 युद्धक विमान होंगे जबकि छह प्रशिक्षण विमान होंगे। उल्लेखनीय है कि विमान की कीमतों और कथित भ्रष्टाचार आदि को लेकर कांग्रेस ने इस समझौते पर सवाल उठाए थे, लेकिन सरकार ने उन आरोपों को खारिज कर दिया था।

With inputs from Bhasha

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