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कोरोना प्रोटोकॉल को ध्यान में रखकर किया गया रावण दहन, सीएम भूपेश बघेल ने कहा- रावण परम ज्ञानी और विद्वान थे, लेकिन अहंकार बना नाश का कारण

रायपुर। प्रदेश की राजधानी की रावणभाटा मैदान में विजय दशमी के पर्व पर हर वर्ष की तरह दशहरा कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। हालांकि इस साल रावण का दहन सांकेतिक रूप से किया जाएगा।

इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने सम्बोधन में कहा कि इस पर्व को हर साल इसलिए ही मनाया जाता है कि हम अपनी,अपने समाज की,आसपास की बुराई को समाप्त कर लें। बुराईयों को नष्ट किए बिना जीवन का लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा। हमें आगे आने वाली पीढ़ी को सिखाना है कि जो दूसरों की सम्पत्ति पर बुरी नजर रखता है,पराई स्त्री पर बुरी नजर डालता है,उसका सर्वनाश निश्चित है।

सीएम ने आगे कहा कि हमारे समाज में हमारे आसपास में और खुद हममें कई बुराई है उसे समाप्त करें रावण असत्य का प्रतीक है अहंकार का प्रतीक है। इसे नाश करना होगा, जब तक हम इस अहंकार का नाश नहीं करेंगे, तब तक हमें जीवन का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कोरोना समाप्त नहीं हुआ है इसलिए नियमों का पालन करें मास्क पहने और दूरी बनाकर रखें इस से हम अपने परिवार को समाज को देश-विदेश को बचा सकेंगे हमें नियमों का पालन कड़ाई से करना है। हर साल हम बड़े बड़े रावण, विभीषण, कुंभकरण का पुतला बनाकर जलाते थे।

लाखों की तादाद में लोग एकत्रित होते थे, जितने जगह भी आयोजन होते थे पैर रखने की जगह नहीं होती थी लेकिन इस साल आयोजन समिति साथियों को पूरे प्रदेश के लोगों को मैं बधाई देता हूं और शुभकामनाएं देता हूं कि कोरोना के संकट में जो आपने सूझबूझ दिखाई और आयोजन को सीमित किया लेकिन परंपरा का भी निर्वहन आप कर रहे हैं। इसके लिए मैं आयोजन समितियों को पूरे प्रदेश के समिति को बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

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