कुंडा उपखंड ग्राम महका में अखंड भारत संकल्प दिवस एवं भारत माता की महाआरती की गयी,उक्त कार्यक्रम मे भारत के प्राचीन गौरवमयी इतिहास की जानकारी दी

कुंडा उपखंड ग्राम महका में अखंड भारत संकल्प दिवस एवं भारत माता की महाआरती की गयी,उक्त कार्यक्रम मे भारत के प्राचीन गौरवमयी इतिहास की जानकारी दी

पंडरिया : दिनांक १८/८/२१ को कुंडा उपखंड ग्राम महका में अखंड भारत संकल्प दिवस एवं भारत माता की महाआरती की गयी। इस अवसर पर मुख्यवक्ता विभाग बौद्धिक प्रमुख श्रीराममुरारी यादव रहे। अपने उद्बोधन में यादव ने भारत के प्राचीन गौरवमयी इतिहास की जानकारी दी। उन्होंने कहा -भारत भूमि का टुकड़ा मात्र नहीं है,यह हमारी माता है और हम इसकी सन्तान है।पौराणिक काल में सम्पूर्ण जम्बूद्वीप पर सनातन संस्कृति का विस्तार था,अनेक मत-पंथों के उदय के पश्चात वैचारिक मतभेद बढ़ने लगा। जिससे विभिन्न विचारधाराओं में टकराव शुरू हुआ।भारतवर्ष में विदेशी आक्रमणों का तांता लग गया।550 ईसा पूर्व भारत में पहला विदेशी आक्रमण ईरान के साइरस द्वारा हुआ,जो नाकाम रहा फिर 326 ईसा पूर्व यूनान के सिकंदर का भारत में आक्रमण हुआ जो सिंध के शासक पोरस द्वारा हारा गया।फिर शक,हूण,कुषाणों का आक्रमण हुआ। ये सभी भारत की संस्कृति में विलीन हो गए। फिर 712 ई.में मोहम्मद बिन कासिम भारत को लूटने आया । इस्लाम का आगमन का मुख्य हेतु भारत की अकूत धन संपदा को लूटना व इस्लाम का प्रचार करना था। फिर महमूद गजनवी, मुहम्मद गोरी आदि आक्रांताओं ने भारतीय संस्कृति पर कुठारघात किया व भारतीय समाज को तोड़ने की पूरी कोशिश की। बप्पा रावल,राणा सांगा, महाराणा प्रताप,गुरु गोविंद सिंह, छत्रपति शिवाजी जैसे महानायकों ने आक्रांताओं से डटकर संघर्ष किया और हिन्दू संस्कृति को गौरवांवित किया।संपूर्ण जम्बूद्वीप में जिस सनातन का शंख गुंजायमान होता था काल के प्रवाह में वह सिकुड़ती चली गई।इसकी जानकारी हमें अपने वेदों और पुराणों में मिलता है ।विष्णुपुराण,वृहस्पति आगम व हिन्दू मांगलिक कार्यो में लिए जाने वाले संकल्प से जम्बू द्वीप की जानकारी प्राप्त होती है।कालांतर में विदेशी आक्रांताओं के कारण हमने अपने गौरवशाली इतिहास को भुला दिया। हमारी संगठनात्मक क्षमता में कमी के कारण यह पवित्र भारतवर्ष कई भागों में बटता चला गया। वामपंथी इतिहासकारों ने अपने विषैले एजेंडे के तहत हमारे महानायकों की छवि को धूमिल करने का षड्यंत्र रचा।आक्रमणकारियों को महान सिद्ध करने का प्रयास किया । पाठ्यक्रम में भारत के गौरवशाली इतिहास को तोड़ मरोड़कर पेश किया।आर्यों को आक्रमणकारी बताया जो कि पूरी तरह झूठ पर आधारित था।भारत का विभाजन कोई स्थापित सत्य नहीं है।हम अपने अटल संकल्प से पुनः ठीक वैसे ही अखंड भारत की स्थापना करने सफल होंगे जिस तरह यहूदी 2000 वर्षों तक विभिन्न देशों में शरणार्थी का जीवन व्यतीत करते हुए 1948 ई.में अपनी मातृभूमि ईजराइल को प्राप्त करने में कामयाब हुए।आज जरूरत समस्त हिन्दू समाज को एकजूट होकर रहने की है।संगठित हिन्दू समाज अपने शौर्य व आंतरिक शक्ति से अखंड भारत की स्थापना करने में सफल होगा चाहे इसके लिए कितने ही पीढ़ियां लग जाए। सीमाएं स्थायी नहीं होती ,समय कालक्रम के अनुसार बदलते रहता है ।जर्मनी का विभाजन और एकीकरण,वियतनाम का एकीकरण,अंग्रेजी दासता से 1947 में भारत की आजादी,अयोध्या में राममंदिर का बनना, कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति आदि कुछ उदाहरण है जो हमें बताता है जो पहले असंभव सी बातें लगती थी उन्हें हमने अपनी प्रचंड संकल्प शक्ति, प्रयत्नों की पराकाष्ठा और अनेक पीढ़ियों तक प्रयास जारी रखने की मानसिक सिद्धता से संभव कर दिखाया। श्री यादव जी वर्तमान में हो रहे धर्मान्तरण पर चिंता व्यक्त किया।यह धर्मान्तरण हिन्दू समाज की शक्ति को कमजोर करने की साजिश है। अपने आसपास हो रहे इस धर्मान्तरण को रोकने की अत्यंत जरूरत है।
कार्यक्रम में उपखंड कुंडा के कार्यवाह होरीलाल गबेल जी ने कहा अखंड भारत संकल्पना मात्र सपना नहीं है यह हमारी निष्ठा,श्रद्धा और प्रतिज्ञा है।बस जरूरत है इस पवित्र संकल्प कोअपने हृदय में बसाए रखने की ।जब इजराइल 2000 वर्षो के संघर्षो के बाद अपना पवित्र भूमि पा सकता है तो हमें भी अखंड भारत की संकल्पना को पूरा करने से कोई रोक नहीं सकता है।
कार्यक्रम में जिला प्रचार प्रमुख श्री प्रियेश शुक्ला जी,खंड पंडरिया के सहकार्यवाह रघुनन्दन गुप्ता जी,मंडल गौसेवा प्रमुख मनहरण यादव जी,सीताराम चंद्राकर जी,भरत चन्द्राकर जी,छेदी चन्द्राकर जी,राजेन्द्र चन्द्राकर जी,किशोर चन्द्राकर जी,लल्लू चन्द्राकर जी,लक्ष्मण चन्द्राकर जी,छैल चन्द्राकर जी,उदेराम चन्द्राकर जी, गनपत चन्द्राकर जी,रामावतार जी ,मूरित चन्द्राकर जी,रघुवीर जी,दशरथ जी,शिवकुमार जी,उदेराम यादव जी,सूदन यादव जी,हरिराम जी,अवधराम जी,दउवा निर्मलकर जी ,बड़ी संख्या में ग्रामीणजन व बच्चे उपस्थित रहे।