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केंद्रीय बजट 2026 – एक विश्लेषण

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केंद्रीय बजट 2026 – एक विश्लेषण

केंद्रीय बजट 2026 को अगर आसान शब्दों में समझें, तो यह बजट किसी बड़े तोहफे या झटके का नहीं है यह बजट बताता है कि सरकार फिलहाल चीज़ों को जैसे चल रही हैं, वैसे ही उनमें कुछ और जोड़कर और वैल्यू एडिशन करके थोड़ा संभालकर आगे बढ़ाना चाहती है।

अभी वर्तमान वैश्वियक व्यवस्त्तथा जो कि काफी उथल पुथल भरी है उसको ध्यान में रखकर  मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार ऐसा बजट पेश किया है जिसमें आम आदमी पर न तो नया टैक्स लगाया गया है और न ही कोई बड़ा बोझ डाला गया है।

आज आम इंसान की सबसे बड़ी चिंता महंगाई, नौकरी, खेती, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और टैक्स को लेकर होती है। इस बजट में सरकार ने यह दिखाने की कोशिश की है कि वह इन सब बातों को समझती है और धीरे-धीरे सुधार करने के पक्ष में है, न कि अचानक बड़े फैसले लेने के।

सरकार ने इस बजट में नई योजनाएँ लाने के बजाय पहले से चल रही योजनाओं को ही मजबूत करने पर ज़ोर दिया है। महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों को सस्ता कर्ज, लखपति दीदी योजना और कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल व बच्चों की देखभाल की सुविधाएँ इसी का हिस्सा हैं। सरकार मानती है कि अगर महिलाएँ कमाने लगेंगी, तो घर और समाज दोनों मजबूत होंगे।

किसानों के लिए भी बजट में यही सोच दिखती है। फसल बीमा, सिंचाई की सुविधाएँ और प्राकृतिक खेती पर ध्यान देकर सरकार यह कहना चाहती है कि किसान की आमदनी को स्थायी बनाया जाए। मोबाइल और डिजिटल माध्यम से मंडी के दाम और मौसम की जानकारी देकर किसान को फैसले लेने में मदद करने की बात भी कही गई है।

युवाओं के लिए सरकार का संदेश साफ है। वह चाहती है कि युवा सिर्फ नौकरी की तलाश में न रहें, बल्कि अपने हुनर के बल पर खुद का काम शुरू करें। इसके लिए प्रशिक्षण, स्टार्टअप और उद्योगों को बढ़ावा देने की बात बजट में की गई है।

गरीब वर्ग के लिए बजट में घर, पानी और इलाज जैसी ज़रूरी बातों पर ध्यान दिया गया है। सरकार का कहना है कि योजनाओं का पैसा सीधे लोगों के बैंक खाते में जाएगा, ताकि बीच में कोई गड़बड़ी न हो और मदद सही व्यक्ति तक पहुँचे।

अब बात टैक्स की, जो ज़्यादातर लोगों के लिए सबसे अहम होती है। नया आयकर कानून 2025 अब 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा  इस बजट में इनकम टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है यानी टैक्स स्लैब पहले जैसे ही रहेंगे इसका मतलब है कि आम करदाता पर नया टैक्स बोझ नहीं डाला गया है।

टैक्स भरने की प्रक्रिया को भी थोड़ा आसान ज़रूर किया गया है। अब अगर किसी से इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय कोई गलती हो जाती है, तो उसे सुधारने के लिए ज़्यादा समय मिलेगा। पहले यह समय 31 दिसंबर तक था, अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी, क्योंकि कई बार गलतियाँ जानबूझकर नहीं होतीं।

जो लोग विदेश में पढ़ाई, इलाज या ज़रूरी खर्च के लिए पैसे भेजते हैं और ओवरसीज टूर पैकेज इन सबके लिए भी राहत दी गई है  अब ऐसे मामलों में टीसीएस की दर 5 प्रतिशत से  घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है ।

इनकम टैक्स रिटर्न भरने की तारीखों को लेकर भी साफ समझना ज़रूरी है आयकर दाता जब इनकम टैक्स फॉर्म-1 या फॉर्म-2 भरते हैं, उन्हें 31 जुलाई तक रिटर्न भरनी होगी।  बाकी नान ऑडिट वाले करदाता के लिए फॉर्म भरने के लिए आखिरी तारीख 31 अगस्त है समय पर रिटर्न भरने से जुर्माने से बचा जा सकता है और रिफंड भी समय पर मिलता है।

अब अगर कोई भी कंपनी अपने किसी भी तरह के शेयर बायबैक करती है तो उसमें कैपिटल गेन टैक्स लगेगा तथा जिन्हें कम टीडीएस कटवाना है या टीडीस नहीं कटवाना है उनके लिए बिना आयकर अधिकारी के पास गए स्वचालित तरीके से उसका प्रमाणपत्र मिल जाएगा ।

मध्यम वर्ग के लिए यह बजट कोई बड़ा तोहफा नहीं है, लेकिन यह भरोसा ज़रूर देता है कि सरकार टैक्स व्यवस्था को धीरे-धीरे आसान बनाना चाहती है और ईमानदार करदाता को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा।

लेकिन सरकार 2 नए MINHANS इंस्टीट्यूट, पहाड़ों पर माउंटेन ट्रेन , एस्ट्रोनॉमी के लिए टेलिस्कोप मिशन रेयर अर्थ मेटल , सेमीकंडक्टर विनिर्माण जैसी कुछ योजनाएं भी सरकार की भविष्य के भारत को मजबूत बनाने वाली साबित होगी ।

कुल मिलाकर, बजट 2026 कोई चमत्कार का दावा नहीं करता यह बजट कहता है कि रास्ता वही रहेगा, लेकिन उसे थोड़ा आसान और साफ बनाने की कोशिश होगी अब देखना यह है कि जो बातें बजट में कही गई हैं, वे ज़मीन पर कितनी सही तरह से लागू होती हैं। अगर ऐसा हुआ, तो यह बजट सच में आम आदमी के लिए राहत और भरोसे का बजट बन सकता है।

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